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संस्कृति और परम्परा — अपन पहचान, अपन ताकत

Written by Priya Jha


हम अहि गामक बेटी छी। आजू किछु लिखबाक मौका भेटल तऽ हम पीछा कोना रहब? संस्कृति और परम्परा पर जते लिखी ओ कम अछि।


आधुनिकता बनाम परम्परा

आइ के आधुनिक युग मे तकनीक और तेज जीवनशैली अपन सबके ज़िंदगी एकदम बदल देने अछि। मुदा ओतहि अपन संस्कृति और परम्परा अपना सबके जोड़ि के रखने अछि। चाहे ओ गामक भोज हो, सरस्वती पूजा हो या खटरश — ई केवल रीति-रिवाज नहि अछि, ई अपन सबके जीवन जीबाक तरीका और पहचान अछि।


संस्कृति — समाजक आईना

संस्कृति ओ आईना अछि जाहि मे कोनो समाजक विचार, मूल्य, भाषा, कला और स्वभाव झलकैत अछि। विविधता सँ भरल अपन देश मे हर राज्य, हर समुदाय, हर गाम के अपन अलग संस्कृति अछि — तखनो सब मे एकता और प्रेम देखबाक भेटैत अछि। ई अपन सबके सबसँ पैघ ताकत अछि, कियेक कि एकता मे ही बल अछि।


परम्परा — अमूल्य धरोहर

परम्परा बाबा-परदादा-दाई सँ भेटल अमूल्य धरोहर अछि। चाहे ओ त्यौहार मनेबाक तरीका हो या बड़का-जेठका के सम्मान करब — ई सब चीज जीवनक मूल्य सिखबैत अछि।


नव पीढ़ी सँ आग्रह

लेकिन आइ हमर सबके नव जनरेशन (Gen Z) आधुनिकता के नाम पर संस्कृति और परम्परा के छोड़ि रहल अछि। ई सत्य अछि जे किछु रूढ़िवादी परम्परा मे बदलाव जरूरी अछि — लेकिन अपन जड़ के बिसरि जेनाइ उचित नहि अछि।

नव पीढ़ी के रूप मे अपन सबके जिम्मेदारी अछि कि अपन संस्कृति और परम्परा के समझी, अपनाबी, आगाँ बढ़ी — और अपन गम्हरिया गामक नाम रौशन करी। एक-दोसर के सम्मान करी, स्नेह बाँटी।


अंतिम बात

बेसी नहि, एतबे कहब — संस्कृति और परम्परा केवल अतीतक विरासत नहि, भविष्यक दिशा सेहो अछि।


जय माँ हंसवाहिनी 🙏

 
 
 

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